खेती-किसानी

Strawberry Farming: स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसानों की तगड़ी कमाई, सरकार दें रही सब्सिडी

Strawberry Farming: परंपरागत खेती के साथ भारत में कई तरह के फल की खेती की जाती है ऐसे में स्ट्रॉबेरी की खेती भारत के हिमाचल प्रदेश, कश्मीर, उत्तराखंड, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश के झारखंड में की जा रही है। स्ट्रॉबेरी का सबसे ज्यादा उत्पादन झारखंड के पलामू जिले में हो रहा है। इस फल की खेती करना बहुत ही आसान है और ये कम दिनों में ही बाजार में बिकने आ जाता है। स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानो की अच्छी कमाई ही रही है। इससे अधिक मुनाफा हो रहा है।

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कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के मुताबिक सबसे ज्यादा स्ट्रॉबेरी की खेती झारखंड के पलामू जिले में की जा रही है। यहाँ के किसान इस फल को बड़े ही आसानी से उत्पादन के बाद कोलकाता के मार्केट में बेचने के लिए भेज रहे है। इसकी खेती के लिए तापमान स्थिर होना चाहिए। इसकी बुवाई अक्टूबर माह में शुरू होती है। इसके बाद 3 महीने बाद यह फल तैयार हो जाता है। ऐसे में किसान इस फल को मार्च के महीने में तोड़ सकते है। इसकी खेती से किसानो की अच्छी कमाई हो रही है।

अक्टूबर में खेती, मार्च तक लाभ

स्ट्रॉबेरी की उत्तम फसल के लिए सबसे अच्छी बलुई मिट्टी वाली भूमि होती है। इस मिट्टी में खेती करने से किसान को करीब 3 से 4 लाख का मुनाफा होता है। पूरी दुनिया में स्ट्रॉबेरी अलग-अलग 600 प्रकार है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि पलामू में किसान विंटर डॉन की खेती करते हैं, जिससे काफी अच्छी फसल तैयार होती है। इसके अलावा विंटर स्टार, कमरोसा, स्वीट चार्ली, चांडलर, ओफ्रा, ब्लैक मोर, फॉक्स जैसी किस्म की फसल भारत के किसान करते हैं। जिससे किसानो की मोटी कमाई होती है।

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ऐसे करें खेत तैयार

सबसे पहले किसान खेती के लिए पुणे से पौधे मंगाते है। यह पौधा 10 रुपए प्रति के दाम से मिलता है। एक एकड़ में करीब 20 से 22 हजार पौधे लगते है। जिसमे लगभग 3 लाख तक की लागत लग जाती है। इसकी खेती करने के बाद 3 से 4 बार जुताई करना होता है। साथ ही उर्वरक खाद के लिए गोबर की खाद का इस्तेमाल करें। इसके अलावा कीटनाशक से बचाव के लिए फॉस्फेट और पोटाश का छिड़काव करें। इसके बाद 30 सेंटीमीटर ऊंची और 90 सेंटीमीटर चौड़ी मेड़ तैयार करें। हर मेड़ की दूरी लगभग 40 से 50 सेंटीमीटर का रास्ता बनाए. इसके बाद मेड़ में ड्रिप एरिगेशन की पाइपलाइन को बिछा दें। अब मेड़ पर मल्चिंग करके मल्च में 20-20 सेंटीमीटर की दूरी पर विंटर डॉन एक-एक पौधा लगाएं। एक एकड़ में लगभग 20 से 24 हजार पौधे लगाएं. इसके बाद शुरुआत में नत्रजन का प्रयोग कर सकते हैं. बाद में हल्की मात्रा में इसका प्रयोग करें।

सरकार से रही सब्सिडी

जानकारी के लिए आपको बता दें स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर सरकार किसानों की मदद कर रही है। ऐसे में किसानों को सरकार की ओर से 90% सब्सिडी दी जा रही है। स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले सभी किसान इस योजना का लाभ ले सकते है। यदि कोई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करना चाहता है तो वह अपने जिला कृषि पदाधिकारी से पूर्ण जानकारी जरूर ले। इससे किसान को इस योजना का लभा मिल जायेगा।

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