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Ramakrishna Jayanti 2024: स्वामी रामकृष्ण परमहंस के ये 10 विचार, बदल सकते हैं आपकी सोच

Ramakrishna Jayanti 2024 : रामकृष्ण परमहंस भारत के एक महान संत, आध्यात्मिक गुरु एवं विचारक थे। इन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। हर साल फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्मदिवस मनाया जाता है। आज 12 मार्च 2024 को स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती है। रामकृष्ण परमहंस की गिनती ऐसे ही महात्माओं में की जाती है, इसलिए उनके नाम के साथ परमहंस भी लगाया जाता है। स्वामी विवेकानन्द श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे।

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स्वामी राम कृष्ण परमहंस का जन्म 17 फरवरी, 1836 को बंगाल के ग्राम कामारपूकूर में हुआ था। उनका बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय हैं। इन्होंने सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। उन्हें बचपन से ही विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो। रामकृष्ण एक भारतीय हिंदू रहस्यवादी, दार्शनिक, संत थे। रामकृष्ण मिशन का नाम भारतीय संत रामकृष्ण परमहंस के नाम पर और उनसे प्रेरित होकर रखा गया है और इसकी स्थापना 1 मई 1897 को रामकृष्ण के प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने की थी। उनके जीवन से हमें बहुत सी सीख मिलती हैं। तो आइये जानते है रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उनके कुछ उपदेशों के बारे में।

रामकृष्ण परमहंस की अनमोल विचारधाराएं

  1. रामकृष्ण परमहंस के मुख्य विचार है उन्होंने संत से कहा कि संत तो बुरे मनुष्य की अंदर से अच्छाई और बुराई का पता लगा लेते है। ऐसे ही व्यक्ति को भी किसी से बैर नहीं करना चाहिए और हर चीज में अच्छाइयों को ढूँढना चाहिए।
  2. भगवान के कृपा की हवा तो हमेशा ही बह रही है, ये हमारे हाथ में है कि हम अपनी नाव की पाल चढ़ायें और ईश्वरीय कृपा की दिशा में बढ़ जायें।
  3. अहंकार के बारे में रामकृष्ण परमहंस के विचार थे कि अहंकार ही असल रूप में माया है। अतः मनुष्य को इसका त्याग कर देना चाहिए। अहंकार को त्याग कर के ही मनुष्य अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
  4. भगवान जब जगह है लेकिन हर मनुष्य के रूप में वो तुम्हारे समक्ष ही तो है। प्राणीमात्र को ईश्वर मानते हुए उसकी सेवा करो। यह ईश्वर की पूजा के समान ही फलदायी है।
  5. तुम ईश्वर की चाहे जैसे प्रार्थना करो, वो उन तक पहुँचती है। ध्यान रखो वो चींटी के कदमों की आहट भी सुन सकते हैं।

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  1. ईश्वर के अनंत नाम हैं और असंख्य रास्ते हैं जिससे उनसे संपर्क किया जा सकता है। तुम जिस भी नाम और रूप से उनकी वंदना करोगे, उसी से वो तुमको प्राप्त हो जायेंगे।
  2. रामकृष्ण के अनुसार यह समस्त संसार माया के रूप में है। इस माया के प्रभाव के कारण ही मनुष्य जन्म-मरण के चक्र में फंसा रहता है। अतः मनुष्य को ईश्वर का चिंतन करने से माया समझ में आती है, तभी वह अपने लिए मोक्ष का मार्ग बनाने में सफल होता है।
  3. ​स्वामी रामकृष्ण परमहंस के अनुसार हर व्यक्ति दिखने में अलग और स्वाभाव से भी अलग होता है। कोई दिखने में गोरा है, कोई काला है, कोई सीधा है, तो कोई क्रूर है परंतु सभी में इश्वर तत्व विद्यमान है। अतः सभी में ईश्वर की छवि देखना चाहिए।
  4. जो व्यक्ति दूसरों की बिना किसी भी स्वार्थपूर्ण उद्देश्य से मदद करता है, वो असल में खुद के लिए अच्छे का निर्माण कर रहा होता है।
  5. अगर किसी सफेद कपड़े में छोटा सा भी दाग लग जाए, वो दाग देखेने में बहुत बुरा लगता है। इसी प्रकार किसी साधु का छोटे से छोटा दोष भी बहुत बड़ा प्रतीत होता है।
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