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Mandir Puja Rules: किस भगवान की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए? जानें परिक्रमा का नियम और महत्व

Mandir Puja Rules: किस भगवान की कितनी बार परिक्रमा करनी चाहिए? जानें परिक्रमा का नियम और महत्व, आपने अक्सर देखा होगा कुछ भक्त मंदिर के बाहर चोरों ओर घूमकर परिक्रमा लगाते है। सनातन धर्म में धार्मिक स्थलों पर पूजा के दौरान देवी-देवताओं की परिक्रमा भी की जाती है। शास्त्रों में मंदिर में पूजा करने के कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं। ऐसा ही एक नियम है परिक्रमा का नियम। यह बहुत ही शुभ होता है। इसका भगवान उत्तम फल देते है। ऐसा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते है और पूजा करने के अनगिनत लाभ की प्राप्ति होती है। तो आइये जानते है किसी देवी-देवता की परिक्रमा से प्राप्त होने वाले शुभ फलों के बारे में.

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मंदिर में परिक्रमा का महत्व

मंदिर में हर भगवान की परिक्रमा का एक विशेष महत्व होता है। सभी देवी-देवताओं की अलग-अलग परिक्रमा भी की जाती है। लेकिन कुछ लोग मंदिर के बाहर से सभी की एक साथ परिक्रमा करते है। हिन्दू धर्म के वैदिक ग्रंथ- ऋग्वेद में पिरक्रमा का वर्णन मिलता है। इसे पूजा का ही एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। मान्यता है कि भगवान की परिक्रमा करने से पापों का नाश होता है। मंदिर मे परिक्रमा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

परिक्रमा करने के नियम

शास्त्रों के अनुसार परिक्रमा करते समय कुछ नियम का पालन भी करना होता है। अगर आप मंदिर में परिक्रमा कर रहे है तो हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। अर्थात भगवान के दाएं हाथ की तरफ से परिक्रमा शुरू करना चाहिए। साथ ही परिक्रमा के समय कुछ मंत्रों का जाप भी करना चाहिए। इससे आपको परिक्रमा करने का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

परिक्रमा मंत्र

कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।
तानि सवार्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे।।

अर्थ – हमारे द्वारा जाने-अनजाने में किए गए और पूर्वजन्मों के भी सारे पाप प्रदक्षिणा के साथ-साथ नष्ट हो जाए।

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जानें किस देवता की कितनी बार करें परिक्रमा?

मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की सात, श्रीगणेश की चार, भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों की चार, देवी दुर्गा की एक, हनुमानजी की तीन, शिवजी की आधी प्रदक्षिणा करने का नियम है। शिवजी की आधी प्रदक्षिणा ही की जाती है, इस संबंध में मान्यता है कि जलधारी को लांघना नहीं चाहिए। इसलिए जलधारी तक पंहुचकर परिक्रमा को पूर्ण मान लिया जाता है।

परिक्रमा का विशेष महत्व

आपको बता दें कि मंदिरों में परिक्रमा करना एक बहुत ही सामान्य अनुष्ठान है। इसे परिक्रमा या प्रदक्षिणा या प्रदक्षिणम भी कहा जाता है। भक्त मंदिर के देवता के निवास स्थान के सबसे भीतरी कक्ष के चारों ओर घूमते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से देवता प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से मनुष्य की हर मनोकामना पूरी होती है।

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